अक्टूबर 2018 में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा रिटायर होंगे
अक्टूबर 2018 में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा रिटायर होंगे(फोटो: Arnica Kala/The Quint)
  • 1. भारत का चीफ जस्टिस बनने के लिए कौन योग्य है?
  • 2. इस परंपरा में क्या कोई अपवाद भी मौजूद है?
  • 3. सीजेआई की नियुक्ति की प्रक्रिया क्या है?
  • 4. क्‍या इसमें सरकार का कोई रोल नहीं होता?
गोगोई बने CJI, कैसे होती है चीफ जस्टिस की नियुक्ति

जस्टिस रंजन गोगोई का देश का अगला मुख्य न्यायाधीश बनना तय हो गया है. 2 अक्टूबर को वर्तमान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा रिटायर हो रहे हैं. मौजूदा चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने उनके नाम की सिफारिश वाली चिट्ठी सरकार को भेज दी है.

पिछले दिनों सरकार ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा से उनके उत्तराधिकारी का नाम पूछा था. परंपराओं के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के सबसे सीनियर जज को चीफ जस्टिस बनाया जाता है. और सीनियॉरिटी के हिसाब से जस्टिस गोगोई जीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के बाद सबसे ऊपर हैं.

गोगोई सुप्रीम कोर्ट के उन चार जजों में शामिल रहे हैं, जिन्‍होंने जनवरी 2018 में अभूतपूर्व प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी . इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट के कामकाज के तरीके और न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए गए थे. उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने पर न सिर्फ चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, बल्कि केंद्र सरकार की नाराजगी कितनी गहरी थी, ये बात केंद्रीय कानून और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलकर सामने आई थी. तब एक सवाल के जवाब में प्रसाद ने कहा था कि :“कोई वजह नहीं है कि सरकार की मंशा पर कोई संदेह किया जाए. वहां चीजों को लेकर एक परंपरा है और सीजेआई को अपने उत्तराधिकारी के नाम को आगे करने दीजिए,
उसके बाद सरकार उस पर चर्चा करेगी.” लेकिन वहां परंपरा क्या है? सीजेआई के प्रस्ताव की अहमियत क्या है? और उस पर सरकार क्या चर्चा करेगी?

  • 1. भारत का चीफ जस्टिस बनने के लिए कौन योग्य है?

    अक्टूबर 2018 में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा रिटायर होंगे
    (फोटो: The Quint)

    भारत के संविधान में इस बात का ब्योरा नहीं है कि देश के चीफ जस्टिस की नियुक्ति कैसे होगी? आर्टिकिल 124 (1) कहता है कि भारत का एक सुप्रीम कोर्ट कोर्ट होगा, जिसमें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया होगा. लेकिन ये आर्टिकिल चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की योग्यता और उसकी नियुक्ति पर मौन है. संविधान में एकमात्र आर्टिकिल 126 ही है, जो सीजेआई की नियुक्ति पर कुछ कहता है, इसमें कार्यकारी सीजेआई की नियुक्ति के बारे में कहा गया है.

    सीजेआई की नियुक्ति को लेकर कोई संवैधानिक प्रावधान न होने की वजह से ही हमें इसकी नियुक्ति में परंपराओं का सहारा लेना पड़ता है.

    जहां तक परंपराओं का सवाल है, तो ये एकदम सीधा सा है, जब मौजूदा सीजेआई रिटायर होंगे (सुप्रीम कोर्ट के सभी जज 65 साल की उम्र में रिटायर होते हैं), तो सुप्रीम कोर्ट के सबसे सीनियर जज बतौर सीजेआई उनकी जगह लेंगे.

    यहां पर सवाल उम्र का नहीं होता, ये निर्भर करता है कि कोई भी जज कब सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया गया. जो जज जितने लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट में है, वो उतना ही सीनियर होता है. इसको आप ऐसे समझ सकते हैं- मान लीजिए कि जब सीजेआई रिटायर हो रहे हों, तो कोई एक जज ऐसा है, जिसकी उम्र 63 साल है और वो 5 साल से सुप्रीम कोर्ट में काम रहा है. जबकि एक दूसरे जज की उम्र वैसे तो 62 साल है, लेकिन वो 6 साल से सुप्रीम कोर्ट में है. ऐसी स्थिति में वरिष्ठता के पैमाने पर 62 साल की उम्र वाला जज सीनियर होगा और उसी को देश का अगला सीजेआई होना चाहिए.

    ऐसे में मामला तब पेचीदा हो जाता है, जब दो जजों की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में एक दिन हुई होती है और ऐसा अक्‍सर ही होता है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति उसी दिन हुई थी, जिस दिन (10 अक्टूबर 2011) जस्टिस चेलमेश्वर नियुक्त किए गए थे. लेकिन उम्र में 4 महीने छोटे होने के बावजूद दीपक मिश्रा अगस्त 2017 को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बने.

    ऐसी स्थिति में वरिष्ठता तय करने के लिए निम्नलिखित चीजों का इस्तेमाल किया जाता है :

    1. ये देखा जाता है कि किस जज को पहले शपथ दिलाई गई थी- इसी को आधार बनाकर जस्टिस मिश्रा और चेलमेश्वर में से जस्टिस मिश्रा का चुनाव सीजेआई के लिए हुआ था. साल 2000 में इसी आधार पर जस्टिस रूमा पाल और वाय के सभरवाल के बीच फैसला हुआ था.
    2. किस जज ने हाईकोर्ट में ज्यादा वक्त तक सेवा दी है.
    3. या फिर ये भी देखा जाता है कि किस जज को सीधे बार ने नॉमिनेट किया है (जैसे कि जस्टिस रोहिंटन नरीमन या इंदु मल्होत्रा) और किसने पहले हाईकोर्ट के जज के रूप में काम किया है. ऐसी स्थिति में हाईकोर्ट में काम करने का अनुभव रखने वाले जज को सीजेआई के पद के लिए प्राथमिकता दी जाती है.

    सीजेआई की नियुक्ति के लिए ये परंपरा पुराने समय से चली आ रही है और जिसकी 1993 में सुप्रीम कोर्ट ने ‘सेकेंड जजेज केस’ में पुष्टि की थी. इसमें बहुमत की राय के साथ कहा गया था कि:

    (6) चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की नियुक्ति करते हुए सबसे वरिष्ठ जज को ही इसके लिए उपयुक्त माना जाना चाहिए.
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