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आरोग्य सेतु बनेगा 'वैक्सीन पास', ऐप दिखाकर देशभर में घूम सकेंगे

लोगों को ये डबल ब्लू टिक तभी दिया जाएगा जब लोगों को दोनों डोज मिल चुके होंगे.

Updated
भारत
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आरोग्य सेतु बनेगा 'वैक्सीन पास', ऐप दिखाकर देशभर में घूम सकेंगे

भारत सरकार के कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ऐप आरोग्य सेतु ने एक नए फीचर का ऐलान किया है. इस नए फीचर के जरिए आपके वैक्सीनेशन का स्टेटस पता चल सकेगा. जिस किसी ने भी कोरोना वायरस के डोज लिए हैं उनके ऐप पर 'ब्लूट टिक और ब्लू शील्ड' दिखेगा. ऐसे में अगर आप भारत में एक हिस्से से दूसरे हिस्से में ट्रैवल कर रहे हैं तो ये ऐप ही आपके लिए पास का काम करेगा.

भारत सरकार ने आरोग्य सेतु ऐप का इस्तेमाल कोरोना संकट के शुरुआती दिनों में संक्रमित लोगों को ट्रैक करने में किया था. इससे पता चलता था कि यूजर कोविड के हाई रिस्क एरिया में तो नहीं है.

मंत्रालय के सूत्रों ने क्विंट को बताया है कि इस नए फीचर के जरिए वैक्सीन के दोनों शॉट ले चुके लोग पूरे देश में ट्रैवल कर सकेंगे. बस आपको ट्रैवल करते वक्त ऐप के स्टेटस को दिखाना होगा.
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ऐप में वैक्सीनेशन स्टेटस कैसे अपडेट करें?

  • अपना आरोग्य सेतु ऐप खोलें

  • ‘Update your vaccination status’ पर टैप करें

  • CoWIN पोर्टल पर अपने मोबाइल नंबर की सहायता से लॉग इन करें.

  • अपना नाम सिलेक्ट करें

  • अब आपका वैक्सीनेशन स्टेटस अपडेट हो जाएगा.

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ट्रैवल के लिए पास

आरोग्य सेतु बनेगा 'वैक्सीन पास', ऐप दिखाकर देशभर में घूम सकेंगे

(फोटो- स्क्रीनशॉट)

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मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी ने क्विंट को बताया कि आरोग्य सेतु ऐप पर ब्लू शील्ड देशभर में ट्रैवल करने के लिए पास के रूप में काम करेगा. इससे आप पूरे देश में स्वतंत्र रूप से घूम सकते हैं.

ऐप के नए फीचर के जरिए सरकारी अधिकारी उन लोगों में भेद कर पाएंगे जिन्होंने वैक्सीन ले ली है और वो जिन्होंने वैक्सीन नहीं ली है. लोगों को ये डबल ब्लू टिक तभी दिया जाएगा जब लोगों को दोनों डोज मिल चुके होंगे.

जिन लोगों को एक ही डोज मिला है, उन्हें ‘Partially Vaccinated’ माना जाएगा और उन्हें सिंगल टिक ही मिलेगा.
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अनिवार्य होगा या नहीं? अभी साफ नहीं

आरोग्य सेतु ऐप के डेवलपर्स ने नया फीचर लॉन्च तो कर दिया, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग वैक्सीन लें. लेकिन अब तक ये नहीं बताया गया है कि इस ऐप का प्रयोग अनिवार्य होगा या नहीं.

इसकी वजह ये है कि भारत में करीब 90 करोड़ लोगों के पास स्मार्टफोन नहीं है. भारत जैसे डिजिटल डिवाइड से भरे देश में इसे लागू करना चुनौती से कम नहीं है.

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