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हिमाचल प्रदेश: स्टूडेंट वर्दी स्कीम पर सरकार ने लिया फैसला, BJP ने उठाए सवाल

राज्य सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले की विपक्ष जमकर आलोचना कर रहा है.

Published
भारत
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वित्तीय संकट से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) को कर्ज से निकालने के लिए प्रदेश की सुक्खू सरकार नए फैसले ले रही है. हर रोज इस बात पर चर्चा हो रही है कि कैसे फालतू खर्चे कम किए जाएं. इसी कड़ी में सुक्खू सरकार ने अब छात्रों की फ्री वर्दी योजना को भी बंद कर दिया है.

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राज्य सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले की आलोचना भी हो रही है. बीजेपी मुद्दे को भुनाने की कोशिश में है और लगातार हमला कर रही है.

लाखों छात्रों पर होगा असर

सरकार के वर्दी स्कीम में संसोधन से करीब सवा चार लाख छात्रों को नुकसान हुआ है. ये लाभ पहले आठ लाख छात्रों को मिलता था लेकिन सरकार के संसोधन के बाद अब केवल तीन लाख 70 हजार छात्र ही स्कीम का लाभ ले सकेंगे.

क्यों और किसके लिए वर्दी स्कीम हुई बंद?

प्रदेश सरकार द्वारा लिए गए फैसले के मुताबिक अब 9 से 12वीं कक्षा के छात्रों को सरकार की तरफ से निशुल्क वर्दी नही दी जाएगी. सरकार के इस फैसले पर कैबिनेट की मुहर भी लग चुकी है. बता दें कि 11वीं और 12वीं क्लास के छात्रों को मुफ्त वर्दी देने की स्कीन वीरभद्र सरकार ने शुरू की थी लेकिन सुक्खू सरकार ने बैठक में इस पर चर्चा की और योजना में संशोधन किया. सरकार ने स्कीम बंद करने की वजह वित्तीय संकट को बताया है.

अभी तक कैसे मिलता था योजना का लाभ

सरकार ने स्कीम को बंद करके मध्यम से लेकर गरीब तबके के विद्यार्थियों को बड़ा झटका दिया है. सरकार की तरफ से अभी तक पहली से 12वीं के छात्रों को वर्दी के दो-दो सेट फ्री दिए जाते थे, जबकि पहली से 10 तक के छात्रों को सिलाई के लिए 200-200 रुपए भी मिलते थे. 11वीं व 12वीं कक्षा के बच्चों को सिर्फ वर्दी मिलती थी.

संशोधन के बाद अब सरकार बच्चों को वर्दी नहीं, बल्कि उनके या उनकी माता के बैंक खाते में 600 रुपये भेजेगी. वहीं क्लास एक से आठ तक के सभी विद्यार्थियों को ये सुविधा नहीं मिलेगी. स्कीम का लाभ लड़कियों, SC, ST और BPL परिवार से संबंध रखने वाले लड़कों को मिलेगा. वहीं सामान्य वर्ग से संबंध रखने वाले किसी लड़के को यह लाभ नहीं मिल सकेगा.

सरकार को क्या फायदा ?

दरअसल कई बार स्कूलों में मिलने वाली वर्दी की गुणवत्ता पर सवाल खड़े होते रहे हैं. लिहाजा सरकार ने वर्दी गुणवत्ता से अपने ऊपर उठने वाले सवालों को लेकर यह फैसला लिया है, जिससे सीधे खाते में पैसे भेजने से परिजनों की मर्जी की क्वालिटी वाला कपड़ा खरीद सकते हैं.

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BJP ने उठाए सवाल

सरकार के फैसले के बाद विपक्ष लगातार हमलावर हैं. मामले को लेकर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप ने कहा है कि प्रदेश सरकार के द्वारा सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की मुफ्त वर्दी को बंद करना दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार ने जयराम ठाकुर के नेतृत्व में पहली कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को मुफ्त में वर्दी प्रदान की थी और उसके साथ-साथ एक से 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों को 200 रूपए वर्दी सिलाई भी उपलब्ध करवाए जाते थे, लेकिन कांग्रेस सरकार ने आते ही इस वर्दी को बंद कर दिया है, जो कि गलत है.

बीजेपी सरकार स्कूलों में 8 लाख बच्चों को वर्दी मुफ्त प्रदान करती थी और कांग्रेस सरकार केवल 3.70 लाख बच्चों को 600 रूपए वर्दी के लिए प्रदान करेगी, लेकिन यह 600 रूपए भी केंद्र की स्कीम के अंतर्गत राज्य को मिल रहे है, इसका मतलब यह हुआ कि बच्चों की वर्दी में हिमाचल सरकार का योगदान जीरो है.
सुरेश कश्यप, बीजेपी नेता

ABVP के प्रदेश मंत्री आकाश नेगी ने भी सरकार को जमकर घेरा है. उन्होंने कहा है कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही पहले सैंकड़ों शिक्षण संस्थाओं को बंद‌ करने का काम किया है और अब वर्दी स्कीम को बंद कर दिया है, जो कि सरासर गलत है.

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शिक्षा मंत्री का जवाब

इस मामले पर हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार से कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को वर्दी के लिए बजट आता है. लिहाजा सरकार ने अब फैसला लिया है कि छात्रों को वर्दी देने के बजाए उसका पैसा सीधा खाते में डाला जाएगा.

उन्होंने कहा कि प्रदेश की खराब वित्तीय स्थिति को देखते हुए कैबिनेट में इस योजना में कुछ बदलाव किया है.

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