पॉडकास्ट: जिस शहर में रहती थी हीरे की चमक,वहां छाया मंदी का अंधेरा
क्यों फीकी पड़ रही डायमंड कारोबार की चमक?
क्यों फीकी पड़ रही डायमंड कारोबार की चमक?(फोटोः Quint Hindi)

पॉडकास्ट: जिस शहर में रहती थी हीरे की चमक,वहां छाया मंदी का अंधेरा

त्योहारों ने दस्तक देनी शुरू कर दी है. बाजार सजने के लिए तैयार है. लेकिन इकनॉमी में मंदी की खबरों के बाद सबको चिंता है क्या बाजार में वैसी ही रौनक रहेगी, जैसी हर साल रहती है. कम से कम दुनिया में चमक बिखेरने वाली भारत की डायमंड इंडस्ट्री को तो ऐसा ही लगता है.

इंडस्ट्री में कारोबारी परेशान हैं, उनकी कमाई घट रही है. एक्सपोर्ट कम हो रहा है. कारीगरों की नौकरियां जा रही हैं. हालत ये है कि डायमंड वर्कर्स की आत्महत्या की खबरें आने लगी हैं.

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देश की डायमंड सिटी कहे जाने वाले शहर सूरत में इसी इंडस्ट्री में काम करने वाले 5 वर्कर्स ने आत्महत्या कर ली. साफ है डायमंड इंडस्ट्री बुरे दौर से गुजर रही है.

सूरत वर्कर्स एसोसिशन के मुताबिक, गुजरात में करीब 25 लाख डायमंड पॉलिशर्स हैं, जिसमें से करीब 66,000 लोगों की नौकरी पिछले कुछ हफ्तों में जा चुकी है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिसंबर 2018 से अब तक करीब 1 लाख लोग इस इंडस्ट्री में नौकरी गंवा चुके हैं. नौकरी गंवानों वालों में ज्यादातर डायमंड वर्कर हैं.

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सूरत के डायमंड वर्कर्स एसोसिएशन के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में 5 वर्कर्स ने आत्महत्या कर ली है. 2008 की आर्थिक मंदी में डायमंड की मांग आने के बाद इस पर 2009 में यूनएडीपी की स्टडी आई थी.

इस स्टडी के मुताबिक, मांग की कमी का सबसे पहले असर निचले स्तर पर काम करने वाले कारीगरों पर पड़ता है. सबसे पहले कॉस्ट कट का असर यहीं देखने  मिलता है. लेकिन ये अभी अहम क्यों हैं वो इसलिए कि इंडस्ट्री के कुछ लोगों को लगता है कि फिर से 2008 जैसी मंदी आ सकती है.

लेकिन क्या आने वाले कुछ महीनों में हालातों में कोई सुधार आएगा? वैसे ऐसा लगता तो नहीं है. फैक्टरियों के मालिक बताते हैं कि हर साल क्रिसमस त्योहार के चलते जुलाई अगस्त के महीने में इंटरनेशनल मार्केट से अच्छी डिमांड देखने को मिलती है. लेकिन इस साल कोई खास डिमांड नहीं है. इंडस्ट्री को अब कोई विकल्प नजर नहीं आता.  लेकिन हीरा कारोबारियों को अब भी उम्मीद है कि सूरत के डायमंड कारोबार में चमक फिर से लौटेगी.

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