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IND Vs AUS: ऑस्ट्रेलिया से कैसे पिछड़ा भारत, ये 8 गलतियां नहीं होतीं तो हम चैंपियन होते?

ICC World Cup Final: 46 दिनों तक चलने वाले वर्ल्डकप में 45 दिनों तक चैंपियन रहने वाली भारतीय टीम से कहां चूक हुई?

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ICC World Cup Final 2023: 46 दिनों तक चलने वाले विश्वकप में 45 दिनों तक दिलों को जीतनी वाली टीम इंडिया ने अपने 46वें और चैंपियन बनने वाले मैच में दर्शकों को एक बाउंट्री के लिए तरसा दिया. नीली जर्सी में उत्साह से स्टेडियम पहुंचे दर्शकों को उम्मीद थी कि वायुसेना के करतब की तरह ही टीम इंडिया भी करतब दिखाएगी, अफसोस!...उन्हें निराशा हाथ लगी.

जब रोहित शर्मा ने ऑस्ट्रेलिया की तरफ से दूसरा ओवर लेकर आए हेजलवुड की दूसरी और तीसरी गेंद पर लगातार दो चौके जड़े तो 127dB की आवाज से पूरा स्टेडियम उछल पड़ा, मानो आसमान में गर्जना हो रही हो. लेकिन, दूसरे ही पल जब स्टार्क ने शुभमन गिल का विकेट लिया तो एक लाख से ज्यादा दर्शकों वाले स्टेडियम में सन्नाटा पसर गया और इस सन्नाटे में अफसोस! (ओह नो...! ओ...अरेएएएए...ओह! शीट...) की आवाज में उत्साहित 11 ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की भी आवाज दब गई.

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खैर, अब भारतीय प्रशंसकों का ये हरा जख्म इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है. लेकिन, ये जरूरी हो जाता है कि जीत का श्रेय लेने वाले खिलाड़ियों की कमियों पर भी बात की जाए, जिससे आने वाले दिनों में सबक लिया जा सके. आज हम भारतीय टीम की हार की कुछ वजहों पर प्रकाश डालेंगे, जिस पर अगर भारतीय टीम ने अमल किया होता तो शायद वह चैंपियन होती.

बल्लेबाजी में भारत का प्रदर्शन

वर्ल्डकप की शुरुआत भारत ने ऑस्ट्रेलिया पर जीत के साथ ही की थी. लेकिन, अफसोस!...अंत हार के साथ हुई. पिछले 10 मैचों में अजेय रही भारतीय टीम की बल्लेबाजी उस तरह से 11वें मैच में नहीं दिखी जिस तरह से उसने अपने पिछले मैचों में की थी. भारत का मध्यमक्रम (श्रेयस अय्यर, सूर्यकुमार यादव, रविंद्र जडेजा) फ्लॉप रहा. सलामी जोड़ी भी कुछ कमाल नहीं दिखा पाई.

लगातार दो ओवर में दो विकेट

ऑस्ट्रेलिया के 5वें ओवर की दूसरी गेंद पर शुभमन गिल आउट होकर पवेलियन लौट गए. हालांकि, इसके बाद भी रोहित डटे रहे. अपने शानदार फॉर्म में चल रहे रोहित ने कुछ बाउंड्री के साथ ऑस्ट्रेलिया को बैकफुट पर धकेला लेकिन, ऑस्ट्रेलिया की तरफ से 10वां ओवर लेकर आए मैक्सवेल की चौथी गेंदे पर खराब शॉर्ट की वजह से पवेलियन लौट गए. ऑस्ट्रेलिया की जीत के हीरो रहे ट्रैविस हेड ने रोहित का कैच 11 मीटर पीछे दौड़कर लिया. इस कैच के साथ ही ऑस्ट्रेलिया ने जता दिया कि वो इस भीड़ के शोर में बिलकुल दबने वाले नहीं है.

इसके बाद भारत की आगे की कमान संभालने मैदान पर पहुंचे पिछले मैच में जीत के हीरो और भारत के शतकवीर रहे श्रेयस अय्यर ने मैक्सवेल की छठी गेंद पर बाउंड्री जड़ कुछ प्रेसर रिलीज किया, लेकिन 11वें ओवर लेकर आए ऑस्ट्रलियाई कप्तान पैट कमिंस की दूसरी गेंद पर विकेट कीपर जॉस इंग्लिश को कैच थमा चलते बने. बल्लेबाजी में भारत के बैकफुट पर आने की सबसे बड़ी वजह श्रेयस का विकेट रहा.

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244 गेदों में कोई छक्का नहीं, 98 गेंदों के बाद चौका

श्रेयस के आउट होने के बाद बल्लेबाजी करने आए केएल राहुल और विराट कोहली कुछ हद तक भारतीय टीम को आगे ले गए, लेकिन उस हिसाब से पारी को आगे नहीं बढ़ा पाए जिससे ऑट्रेलियाई खिलाड़ियों पर दबाव महसूस हो. ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी ने पूरी तरह से राहुल और विराट पर नियंत्रण कर लिया था. लिहाजा, 97 गेंदों तक कोई चौका ही नहीं आया. 10वां ओवर लेकर आए मैक्सवेल की छठी गेंद पर श्रेयस ने चौका जड़ा था, इसके बाद भारत की तरफ 27वें ओवर की दूसरी गेंद पर केएल राहुल ने चौका जड़ा. यानी 98 गेंदों तक बाउंड्री का सूखा रहा. वहीं, भारत की तरफ से केवल एक छक्का लगा, जो रोहित शर्मा ने 10वें ओवर में मैक्सवेल की दूसरी गेंद पर जड़ा था. इसके बाद भारत की तरफ 244 गेंदों पर कोई छक्का ही नहीं लगा.

बैटिंग ऑर्डर में बदलाव, मीडिल ऑर्डर फ्लॉप, धीमी रन गति

भारत का मीडिल ऑर्डर फ्लॉप रहा. श्रेयस अय्यर, सूर्यकुमार यादव और रविंद्र जडेजा, जिसके लिए जाने जाते हैं वो करने में नाकाम रहे. श्रेयस 3 गेंद में 4 रन और जडेजा 22 गेंद में 9 रन, जबकि सूर्यकुमार यादव 28 गेंदों पर 18 रन बनाकर चलते बने. भारत को शुरुआती झटके जरूर लगे, लेकिन रन रेट के हिसाब से भारत की अच्छी शुरुआत रही. शुरुआत 10 ओवर में भारत 2 विकेट के नुकसान पर 80 रन बनाए. हालांकि, अगले 20 ओवर में भारत का विकेट नहीं गिरा, लेकिन रन की गति बहुत धीमी हो गई. 11 से 30 ओवर के बीच विराट और राहुल ने सिर्फ 72 रन ही जोड़े. वहीं, आखिरी के 10 ओवर में भारतीय टीम, विकेट खोकर मात्र 47 रन ही जोड़ सकी. साथ ही विश्वकप में ये पहली बार था, जब भारतीय टीम ऑलआउट हो गई. भारत का 10वां विकेट 50वें ओवर की छठी गेंद पर कुलदीप यादव का गिरा, जो रन आउट हो गए.

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भारत की गेंदबाजी और फील्डिंग

ऑस्ट्रेलिया ने फाइनल मैच में जिस तरह से फील्डिंग का प्रदर्शन किया उस तरह से भारत का प्रदर्शन नहीं दिखा. बुमराह की पहली ही गेंद पर वॉर्नर का कैच सेकेंड स्लिप में गया, लेकिन कोहली और गिल देखते रह गए. ऐसे कई मौके आए, जब बाउंड्री बचाई जा सकती थी, लेकिन भारतीय खिलाड़ी उसे बचाने में नाकाम रहे.

212 गेंद बाद विकेट, मीडिल ओवर में कोई विकेट नहीं

भारत ने हालांकि, शुरुआती ओवर में 3 विकेट झटकर बढ़त बनाई थी. लेकिन, मीडिल ओवर में भारत ने कोई विकेट नहीं लिया. ऑस्ट्रेलिया का तीसरा विकेट 7वें ओवर की आखिरी गेंद पर स्मिथ का गिरा. इसके बाद भारत को चौथा विकेट लेने 43 ओवर की दूसरी गेंद पर मिला. यानी 36.2 ओवर बाद (212 गेंद) भारत को विकेट मिला.

स्पिनर फेल

अभी तक हर मैच में विकेट लेने वाले स्पिनर इस मैच में कमाल नहीं दिखा सके. कुलदीप यादव ने 10 ओवर डाले, 56 रन दिए और इन्हें एक भी विकेट नहीं मिला. ऐसा ही हाल रविंद्र जडेजा का रहा. रविद्र जडेजा ने भी 10 ओवर डाला, 43 रन दिए और एक भी विकेट इनके खाते में नहीं आया. ट्रैविस हेड और लाबुसेने की जोड़ी ने भारतीय स्पिनर को विकेट के लिए तरसा दिया. हालांकि, बीच-बीच में रोहित शर्मा ने बुमराह और शमी को स्पेल दी लेकिन वो भी विकेट नहीं झटक सके. कुलदीप और जडेजा दोनों ने 20 ओवर में 99 रन दिए और विकेट लेने में नाकाम रहे.

बड़ी साझेदारी तोड़ने में नाकाम

अब तक विपक्षी टीम की हर रणनीति को तोड़ने में कामयाब रहने वाले भारतीय गेंदबाज ट्रैविस हेड और लाबुसेन की जोड़ी को तोड़ने में नाकाम रहे. चौथे विकेट के लिए हेड और लाबुशेन ने 192 रनों की पार्टनरशिप की.

सिराज को मीडिल ओवर में बॉल देना

सिराज नई गेंद से विकेट के लिए जाने जाते हैं. लेकिन, रोहित शर्मा ने उन्हें 17वें ओवर में बुलाया तब तक गेंद पुरानी हो चुकी थी. शमी पुरानी गेंद से सिम कराने के लिए मशहूर हैं, लेकिन उन्हें पहले लाया गया. इसके बाद उनके बैक टू बैक 5 ओवर कराए गए. यही काम बुमराह के साथ भी किया गया. अमूमन 3 या 4 ओवर करने के बाद बुमराह को मीडिल ओवर में लाया जाता है, लेकिन विकेट की भूख ने रोहित शर्मा को बल्लेबाजी क्रम में बदलाव करने के लिए मजबूर कर दिया.

विकेट के पीछे भागे गेंदबाज

भारतीय टीम के पूर्व खिलाड़ी और बल्लेबाज विरेंद्र सहवाग ने टीम की हार पर कहा कि...

“हमारे गेंदबाज विकेट लेने के लिए डेसपरेट थे कि हम कुछ करके विकेट ले लें. लेकिन होना ये चाहिए कि गेंदबाज अपने टप्पे पर गेंद डाले और बल्लेबाज गलती करता और विकेट गिरता. भारतीय गेंदबाज विकेट लेने के लिए भाग रहे थे वो करने की जरूरत नहीं थी, जो बाकी 10 मैचों में किया था वही इस मैच में करते तो नतीजा कुछ और होता.”

हालांकि, रोहित शर्मा ने कहा कि“जब आपके पास बोर्ड पर 240 रन हों तो आप जल्द से जल्द विकेट लेना चाहते हैं और हमने ऐसा किया लेकिन फिर हेड और मार्नस को श्रेय जाता है, उन्होंने एक बड़ी साझेदारी की और हमें खेल से पूरी तरह बाहर कर दिया. हमने वह सब कुछ करने की कोशिश की जो हम कर सकते.”

खैर, भले ही भारत 46वें दिन पराजित हो गया लेकिन, टीम पर फक्र है कि 45 दिनों तक वही चैंपियन रहे.

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