आम चुनावों से पहले पार्टियां क्यों हैं WhatsApp से परेशान?

आम चुनावों से पहले पार्टियां क्यों हैं WhatsApp से परेशान?

टेक और ऑटो

कैमरा: सुमित बडोला
वीडियो एडिटर: राहुल शंपुई

नया-नया साल है,
सोशल मीडिया खासकर WhatsApp ने बदली अपनी चाल है,
परिणाम स्वरूप पॉलिटिकल पार्टियों में मच गया बवाल है .

पाय लागी !

किसी महामारी की तरह फैल रहे हेट मैसेज को रोकने के लिए और उससे होने वाली हिंसा को रोकने के लिए, WhatsApp ने एक मैसेज को फॉरवर्ड करने की लिमिट पांच कर दी है. इससे फॉरवर्ड की संख्या कम तो हो गई, लेकिन इसका सीधा असर पड़ा है पॉलिटिकल पार्टियों की कैंपेनिंग स्ट्रेटेजी पर. वो ऐसे कि अब एक अकाउंट से एक मैसेज को सिर्फ पांच लोगों को ही फॉरवर्ड कर सकते हैं.

WhatsApp अधिकारि‍यों के मुताबिक उनके पास 'Best in class Spam Detection Technology' है, जिसके इस्‍तेमाल से वो किसी भी संदेहजनक अकाउंट, जिससे अनचाहे या ऑटोमेटेड मैसेज भेजे जा रहे हों, उसे ट्रैक करके ब्लॉक भी कर सकते हैं.

पिछले दस दिनों में WhatsApp 1,30,000 से ज्यादा अकाउंट ब्लॉक कर चुका है.

चुनावी सीजन आते ही सोशल मीडिया में हेट मैसेज की आंधी सी चल जाती है. ऐसे में अगर कोई ये काटो, घोंटो, बनाओ टाइप के मैसेज फैलाता पकड़ा गया तो IPC की धारा 505 के तहत तीन साल की जेल भी हो सकती है.

WhatsApp PhotoDNA का प्रयोग कर पॉर्न मैसेज के आदान-प्रदान पर भी रोक लगा रही है.
सेक्युरिटी की अगर बात करें, तो जल्द ही WhatsApp पर face ID और पिन लॉक की सुविधा आने वाली है.

बाकी ये पार्टियां बहुते दिमागी हैं. पहले जहां हजारों सिम से काम होता था, अब वहां करोड़ों सिम से होगा. कुछ पार्टियां तो हर राज्य में कॉल सेंटर खोलकर प्रचार करने वाली हैं.

खैर,आप सचेत हो जाइए. न हेट मैसेज फैलाइए, न फैलने दीजिए.  और कोई भी ऐसा ग्रुप जिसमें हेट मैसेज का आदान-प्रदान हो रहा हो उसे तुरंत ब्लॉक कीजिए और रिपोर्ट कीजिए.

ये भी पढ़ें : TRAI का नया टैरिफ: क्या महंगा हो जाएगा केबल टीवी?

(सबसे तेज अपडेट्स के लिए जुड़िए क्विंट हिंदी के WhatsApp या Telegram चैनल से)

Follow our टेक और ऑटो section for more stories.

टेक और ऑटो

    वीडियो