लव जिहाद: न परिभाषा, न डेटा फिर कानून का मकसद क्या है?  

क्या सरकार के पास ऐसा कोई डेटा है, जिससे कथित लव जिहाद का दावा सच माना जा सके?

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वीडियो एडिटर: अभिषेक शर्मा

"ये इश्क नहीं आसां इतना ही समझ लीजे

इक आग का दरिया है और डूब के जाना है.."

शायर जिगर मुरादाबादी ने जब इस शेर को लिखा होगा तब सोचा भी नहीं होगा कि 2020 आते-आते 'आग के दरिया' का मतलब 'लव जिहाद' और 'डूब के जाने' का मतलब कानूनी दांव पेंच बन जाएगा. उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बाद अब बीजेपी शासित एक और राज्य मध्य प्रदेश ने लव जिहाद और धर्मांतरण के नाम पर कानून बनाने का ऐलान किया है.

लेकिन सवाल ये है कि देश के कानून में लव जिहाद कोई शब्द है? क्या सरकार के पास ऐसा कोई डेटा है, जिससे कथित लव जिहाद का दावा सच माना जा सके? क्या दो अलग धर्म के लोगों का प्यार और शादी को लव जिहाद कहा जा सकता है? क्या लोगों की शादी किससे हो ये सरकार तय करेगी? क्या किसी बालिग लड़की या लड़के को दूसरे धर्म या धर्म बदलकर शादी करना सही नहीं है? अगर ऐसा है तो प्यार और आजादी के पैरोकार पूछेंगे जरूर जनाब ऐसे कैसे?

दरअसल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने भोपाल में एक प्रेस मीट के दौरान पत्रकारों से कहा कि वो प्यार के नाम पर कोई भी जिहाद बर्दाश्त नहीं करेंगे. अगर ऐसा होता है तो हम एक्शन लेंगे और इसके लिए कानूनी प्रावधान तलाश रहे हैं.

मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा,

“मध्य प्रदेश धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2020 के तहत प्रस्तावित कानून में लव जिहाद यानी धर्मांतरण के लिए प्रलोभन या दबाव डालकर कराए जाने वाले शादी-विवाह को शून्य घोषित करने का प्रावधान भी किया जा रहा है. “इसमें हम तय कर रहे हैं कि प्रलोभन, बहकावा, फ्रॉड, बलपूर्वक शादी और धर्मांतरण कराने पर 5 साल का कठोर कारावास, इस अधिनियम में हम रख रहे हैं. इस अपराध को गैरजमानती घोषित करें.”
नरोत्तम मिश्रा, गृह मंत्री, मध्य प्रदेश 

नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि अगर कोई स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन शादी के लिए करना चाहता है तो उसे 1 महीने पहले कलेक्टर के यहां आवेदन देना होगा. लेकिन नरोत्तम मिश्रा ने ये नहीं बताया कि मंत्री जी के हिसाब से लव जिहाद का मतलब क्या है? जब मध्य प्रदेश में धर्मांतरण पर कानून पहले से है तो ये नए कानून की क्या जरूरत है?

क्या कथित ‘लव जिहाद’ पर सरकार के पास कोई आंकड़े हैं?

बीजेपी शासित राज्य लव जिहाद पर माहौल तो बना रहे हैं लेकिन क्या लव जिहाद पर सरकार के पास कोई सबूत, कोई आंकड़े हैं? जवाब है नहीं.

साल 2020 के फरवरी में संसद में एक सवाल पूछा गया लव जिहाद से जुड़ा. इसके जवाब में केन्द्रीय राज्य गृह मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा,

“लव जिहाद नाम का टर्म कानून के तहत परिभाषित नहीं है. किसी भी केन्द्रीय एजेंसी द्वारा ऐसा कोई भी केस रिपोर्ट नहीं किया गया है.”

उन्होंने ये भी कहा कि संविधान का अनुच्छेद 25 नागरिकों को किसी भी धर्म को स्वीकार, प्रैक्टिस, और प्रचारित करने की स्वतंत्रता देता है. बशर्ते पब्लिक ऑर्डर, नैतिकता और स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए ये किया जाए.

लव जिहाद: न परिभाषा, न डेटा फिर कानून का मकसद क्या है?  

यही नहीं अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अनिकेत आगा ने आरटीआई के जरिए एनसीडब्ल्यू से लव जिहाद पर आंकड़े जानने चाहे थे. लेकिन एनसीडब्ल्यू ने लव जिहाद को लेकर कोई आंकड़ा जारी नहीं किया. क्योंकि उनके पास कोई आंकड़ा है ही नहीं.

बता दें संविधान के आर्टिकल 25 से लेकर 28 तक में धर्म की आजादी की बात की गई है. आर्टिकल 25 में साफ-साफ लिखा है कि भारत में प्रत्येक व्यक्ति को किसी भी धर्म को मानने की, आचरण करने की तथा धर्म का प्रचार करने की स्वतंत्रता है.

फिर ये पहरा क्यों?

फिलहाल अब तक न तो सरकार, न ही जांच एजेंसियां और न ही अदालतों ने कथित लव जिहाद के दावों को पुख्ता किया है. अब केरल की हादिया का मामला ही ले लीजिए, 2018 में, सुप्रीम कोर्ट ने हादिया मामले में ’जबरन’ धर्मांतर्ण का कोई सबूत नहीं पाया और केरल हाई कोर्ट के फैसले को भी खारिज कर दिया, जिसने हादिया और शाफीन जहां की शादी को रद्द किया था.

यही नहीं साल 2009 में केरल और कर्नाटक में लव जिहाद मामले की जांच में भी पुलिस और जांच एजेंसी को लव जिहाद या जबरन धर्म परिवर्तन के कोई सबूत नहीं मिले थे. सभी मामलों में लव जिहाद का हो हल्ला करने वाले हेट फैलाते ही नजर आए हैं.

मध्य प्रदेश से पहले उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदियत्यानाथ ने कथित लव जिहाद पर राम नाम सत्य की धमकी तक दे डाली थी. उन्होंने कहा था-

“सरकार भी फैसला ले रही है कि हम लव जिहाद को सख्ती से रोकने का काम करेंगे. एक प्रभावी कानून बनाएंगे. जो लोग छद्म वेश में, नाम छिपाकर बहन-बेटियों की इज्जत के साथ खिलवाड़ करते हैं, उन्हें मेरी चेतावनी है कि अगर वो सुधरे नहीं तो राम नाम सत्य है की यात्रा निकलने वाली है.”

अब आखिर में सवाल ये है कि क्या हिंदू लड़कियां इतनी बेवकूफ हैं कि कोई भी उन्हें बहला फुसला ले? क्या ऐसी बातें औरतों की सोच और समझ पर उंगली नहीं उठा रही हैं? क्या ये बातें बालिग लड़कियों को उनका जीवन साथी से लेकर धर्म चुनने की आजादी पर बेड़ियों का काम नहीं करेगी? आखिर में एक और शब्द जिसका डर आपके दिल में बिठाया गया है. जिहाद एक अरबी शब्द है. जिहाद का शाब्दिक अर्थ होता है संघर्ष, Struggle. खुद को बेहतर इंसान बनाने के लिए संघर्ष हो या बेरोजगारी के दौर में नौकरी पाने के लिए struggle. देश को इस वक्त बेरोजगारी दूर करने, बेहतर अस्पताल,स्कूल और कॉलेज खोलने, देश में लव यानी आपसी भाईचारा बढ़ाने के लिए संघर्ष की जरूरत है. नहीं तो देश पूछेगा जनाब ऐसे कैसे?

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