करतारपुर कॉरिडोर भारत-पाकिस्‍तान के लिए इतना अहम क्‍यों? 
(Image: YouTube) 
  • 1. अद्भुत स्थान है करतारपुर गुरुद्वारा
  • 2. दूरबीन से दिखता है गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर
  • 3. भारत में करतारपुर कॉरिडोर से जुड़ी अहम बातें
  • 4. पाकिस्तान में करतारपुर कॉरिडोर से जुड़ी अहम बातें
  • 5. दोनों सरकारों को एकसाथ आया खयाल?
  • 6. कॉरिडोर का सिद्धू कनेक्शन
  • 7. वाजपेयी सरकार ने उठाया था करतारपुर का मसला
करतारपुर कॉरिडोर भारत-पाकिस्‍तान के लिए इतना अहम क्‍यों?

करतारपुर कॉरिडोर बनाने की घोषणा भारत और पाकिस्तान दोनों ने की है. ये कॉरिडोर पाकिस्तान के करतारपुर और भारत के गुरदासपुर के मान गांव को जोड़ेगा. सिखों के पहले गुरु गुरुनानक देव की कर्मस्थली है करतारपुर. यहीं नानक देव ने अंतिम सांसें ली थीं.

इस कॉरिडोर का मकसद सिख श्रद्धालुओं के लिए गुरुनानक देव की पवित्र धरती तक पहुंच और आवाजाही आसान बनाना है. भारत में इसका उद्घाटन 26 नवम्बर को उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने किया. भारत की ओर से इस कॉरिडोर को बनाने की घोषणा 22 नवम्बर को की गई.

पाकिस्तान में करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन 28 नवम्बर को हुआ. प्रधानमंत्री इमरान खान ने इसकी आधारशिला रखी. पाकिस्तान के लिए करतारपुर कॉरिडोर पर्यटन की असीम सम्भावनाएं खोलेगा, जबकि भारत के लिए इसका मकसद है अपने नागरिकों के लिए तीर्थस्थल तक पहुंच बनाना. भारत और पाकिस्तान, दोनों ही सरकारों ने करतारपुर कॉरिडोर बनाने की पहल की है.

करतारपुर गुरुद्वारे के दर्शन के लिए सिख श्रद्धालु अब भारत में डेरा बाबा नानक से इस कॉरिडोर के जरिए सीधे करतारपुर गुरुद्वारे तक जा सकेंगे. इस दौरान श्रद्धालु भारत और पाकिस्तान की ओर से अलग-अलग बनाए गये कॉरिडोर से होकर गुजरेंगे.

  • 1. अद्भुत स्थान है करतारपुर गुरुद्वारा

    करतारपुर में जिस जगह नानकदेव की मौत हुई थी, माना जाता है कि उसी स्थान पर यह गुरुद्वारा है. सिख और मुसलमान, दोनों धर्मों में इस स्थान की मान्यता है. यह गुरुद्वारा नारोवाल जिले के शकरगढ़ तहसील के कोटी पिंड में रावी नदी के पश्चिम में स्थित है.

    करतारपुर के पास हरे-भरे खेत के बीच सफेद रंग की शानदार इमारत दूर से ही नजर आती है. इस गुरुद्वारे के अंदर एक कुआं है. मान्यता के अनुसार, यह गुरुनानक देव जी के समय से है. यहां सेवा करने वालों में सिख और मुसलमान दोनों शामिल हैं.

    1920-29 के बीच इस गुरुद्वारे का पुनर्निर्माण महाराज पटियाला ने कराया था. तब इस पर 1 लाख 35 हजार 600 रुपये का खर्च आया था. इस पुनर्निर्माण की जरूरत रावी नदी में आयी बाढ़ के बाद हुए नुकसान के कारण महसूस की गयी थी. 1995 में भी पाकिस्तान सरकार ने इसके कुछ हिस्सों का निर्माण कराया.

पीछे/पिछलाआगे/अगला

Follow our कुंजी section for more stories.

वीडियो