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दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल से अफसर बने फिरोज आलम की कहानी मिसाल है

दिल्ली पुलिस के आईपीएस अधिकारियों को देखकर हुए प्रभावित

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भारत
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बुलंद हौसले और कड़ी लगन हो तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं होती. दिल्ली पुलिस में कॉन्स्टेबल के पद पर काम कर रहे फिरोज आलम की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. जिन्होंने नौकरी में रहते हुए यूपीएससी एग्जाम में 645वीं रैंक हासिल की है. उनकी इस सफलता का आज पूरी दिल्ली पुलिस जश्न मना रही है और उन्हें एक रोल मॉडल के तौर पर भी देखा जा रहा है. साथ ही कुछ ऐसे पुलिसकर्मी भी हैं जिनकी बेटियां सिविल सर्विस एग्जाम में काफी अच्छी रैंक से पास हुई हैं.

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लेकिन पहले बात कर लेते हैं दिल्ली पुलिस की पीसीआर यूनिट में तैनात कॉन्स्टेबल फिरोज आलम की. जिन्होंने पुलिस की ड्यूटी, जहां पर कोई तय वक्त नहीं होता है, उसमें रहते हुए यूपीएससी का एग्जाम पास किया है. फिरोज आलम ने क्विंट से बात करते हुए बताया कि आखिर कैसे और कब उन्होंने सोचा कि उन्हें अधिकारी बनना है.

सीनियर पुलिस अधिकारियों को देखकर मिली प्रेरणा

जब हमने फिरोज आलम से पूछा कि आखिर कौन सी वो बात थी, जिसने उन्हें यूपीएससी एग्जाम देने के लिए प्रेरित किया तो इसके जवाब में उन्होंने बताया,

“मैं दिल्ली पुलिस में हूं, तो आए दिन आईपीएस अधिकारियों से मेरी मुलाकात होती रहती थी. उनके काम करने के तरीके और बाकी चीजों को देखकर मुझे लगा कि मुझे भी आईपीएस बनने के लिए ट्राइ करना चाहिए. क्योंकि वो सभी अधिकारी मुझे काफी ज्यादा प्रभावित करते थे.”

2014 से शुरू हुए अटेंप्ट

दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल फिरोज आलम ने बताया कि कैसे वो अपने अफसरों को देखकर प्रभावित हो गए थे, अपने पहले अटेंप्ट को लेकर उन्होंने बताया, "मैंने 2013 में सोच लिया था कि मैं यूपीएससी दूंगा. इसके बाद मैंने 2014 और 2015 में यूपीएससी का एग्जाम दिया, लेकिन दोनों बार मैं प्रीलिम्स में ही फेल हो गया. फिर साल 2016, 2017, 2018 और 2019 में मैं मेन्स तक पहुंचा, लेकिन इसे पास नहीं कर पाया. जिसके बाद मैंने अपने फाइनल अटेंप्ट में इस साल यूपीएससी क्रैक किया है."

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युवाओं के लिए टिप्स

फिरोज आलम ने अपनी तैयारी का जिक्र करते हुए कहा कि तैयारी के लिए रोजाना तय नहीं कर सकते हैं कि कितने घंटे पढ़ाई करेंगे. इसके लिए बस एक चीज की जरूरत है कि आप कितने कंसिस्टेंट हैं. यानी चाहे कुछ भी हो लगातार आपका फोकस बना रहना चाहिए. इसके अलावा टाइम मैनेजमेंट भी काफी जरूरी है. फिरोज आलम ने दिल्ली पुलिस में तैयारी कर रहे अपने साथी पुलिसकर्मियों को मैसेज देते हुए कहा कि, ड्यूटी पर रहते हुए पढ़ाई करना मु्श्किल जरूर है, लेकिन इसे मैनेज करना आना चाहिए. अगर आपकी ड्यूटी लंबी लग गई है तो आप उस हिसाब से अपनी पढ़ाई करेंगे, वहीं अगर किसी दिन आपकी जल्दी छुट्टी हो गई तो उस दिन आप पिछले दिन वाला टॉपिक कवर कर सकते हैं. उन्होंने अपनी स्डटी स्ट्रेटेजी को लेकर कहा,

“लोग घंटों के हिसाब से पढ़ते हैं, लेकिन मेरा हर दिन तय होता था कि आज मैं इस टॉपिक को क्लियर करूंगा. अब जितनी देर में वो टॉपिक पूरा होगा उतना ही वक्त लगता था. ऐसे ही हर रोज या हर हफ्ते के अलग टॉपिक होते थे. क्योंकि अगर घंटे के हिसाब से पढ़ता तो कुछ नहीं हो पाता.”

2010 में हुए थे भर्ती

फिरोज आलम दिल्ली पुलिस में साल 2010 में भर्ती हुए थे. उन्होंने 12वीं पास करके दिल्ली पुलिस कॉन्स्टेबल का एग्जाम दिया, जिसमें वो पास हो गए. जिसके बाद से वो दिल्ली पुलिस में तैनात हैं. नौकरी पर रहते हुए ही उन्होंने अपनी ग्रैजुएशन पूरी की.

फिरोज आलम यूपी के हापुड़ जिले के एक छोटे से गांव से हैं. उन्होंने बताया कि उनके पिता स्क्रैप का काम करते थे. साथ ही उन्होंने मजदूरी के कई काम किए हैं. फिरोज ने बताया, "हम लोग 6 भाई और तीन बहनें हैं. मेरे पिताजी ने सभी को अपने इस काम के बावजूद पढ़ाया और आज इस काबिल बनाया. मेरे परिवार ने मेहनत मजदूरी करके हमें एजुकेशन की तरफ मोड़ा."

वेब सीरीज पाताल लोक से मिलती कहानी

हाल ही में एक वेब सीरीज पाताल लोक आई थी, जिसमें दिल्ली पुलिस और क्राइम की कहानी को दिखाया गया था. लेकिन इस वेब सीरीज में इमरान अंसारी नाम के एक सब इंस्पेक्टर का किरदार था, जिसे सोशल मीडिया पर अब कॉन्स्टेबल फिरोज आलम से जोड़ा जा रहा है. क्योंकि वेब सीरीज में भी दिल्ली पुलिस का सब इंस्पेक्टर इमरान अंसारी ऐसे ही ऑफिसर बनने के लिए रातभर मेहनत करता है और आखिरकार यूपीएससी क्रैक कर लेता है.

वेब सीरीज से उनका नाम जोड़े जाने पर फिरोज आलम ने कहा कि, ये अच्छा है कि लोग उस किरदार से मेरा नाम जोड़कर देख रहे हैं. लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है कि मैंने वहां से इंस्पायर होकर यूपीएससी दिया. क्योंकि सीरीज तो अभी आई है और मेरी तैयारी पिछले कई सालों से चल रही है.
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पुलिसकर्मियों की बेटियों ने भी किया कमाल

दिल्ली पुलिस में तैनात कुछ पुलिसकर्मियों की बेटियों ने भी यूपीएससी की परीक्षा पास की है, जिसके बाद पूरा दिल्ली पुलिस परिवार इसे जश्न के तौर पर देख रहा है. दिल्ली के द्वारका डिस्ट्रिक्ट में डीसीपी ऑफिस में तैनात एएसआई राजकुमार यादव की बेटी विशाखा यादव ने यूपीएससी में ऑल इंडिया 6th रैंक हासिल की है. क्विंट से बात करते हुए एएसआई राजकुमार यादव ने बताया कि उनकी बेटी ने इससे पहले दो अटेंप्ट दिए थे, ये उसका तीसरा अटेंप्ट था. उन्होंने बताया कि विशाखा ने इसके लिए सेल्फ स्टडी का ही सहारा लिया था. उन्होंने डीपीयू से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की थी. वो अब आईएएस में जाना चाहती हैं. राजकुमार यादव ने कहा कि बच्चा अगर मेहनत करे तो सब हासिल कर सकता है.

दिल्ली पुलिस के आईपीएस अधिकारियों को देखकर हुए प्रभावित
यूपीएससी में 6th रैंक लाने वालीं विशाखा यादव को बधाई देते डीसीपी द्वारका एंटो एल्फोंस
(फोटो: DCP Dwarka)

इनके अलावा दिल्ली पुलिस के विजिलेंस डिपार्टमेंट में तैनात इंस्पेक्टर सुखदेव सिंह मान की बेटी नवनीत मान ने यूपीएससी में 33वीं रैंक हासिल की है. उन्होने बताया कि उनकी बेटी पहले अटेंप्ट में साल 2017 में भी यूपीएससी क्रैक कर चुकी थीं, लेकिन इसके बाद उसने अच्छी रैंक के लिए दूसरा अटेंप्ट भी दिया. उसने बीटेक कंप्यूटर साइंस की थी, लेकिन उसने सोच लिया था कि वो अथॉरिटी वाली जॉब करेगी. उसका सपना था कि वो आईएएस बनना चाहती हैं. बेटी ने माउंट कार्मेल स्कूल से पढ़ाई की है. सुखदेव सिंह मान ने कहा कि ज्यादातर लोगों को पता नहीं होता कि उनका बच्चा क्या अचीव कर सकता है. बच्चा अगर थोड़ी सी मेहनत करे तो वो आराम से सिविल सर्वेंट बन सकता है.

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