इस साल भारतीय कार खरीदने में क्यों नहीं दिखा रहे दिलचस्पी? 

2019 में भारतीय कार बाजार में बिक्री में बेतहाशा गिरावट देखी जा रही है.

फीचर
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वीडियो एडिटर: पुनीत भाटिया

भारत फिलहाल दुनिया का चौथा सबसे बड़ा कार बाजार है.  लेकिन 2019 की पहली तिमाही कार बाजार के लिए काफी निराशाजनक रही. पिछले साल अप्रैल में, भारत में लगभग 2 लाख (2,00,183) गाड़ियां बेची गई और इस साल अप्रैल में ये आंकड़ा घटकर 1,60,279 पर पहुंच गया. यानी 15.93% की गिरावट. किसी के पास इस बारे में सही-सही जवाब नहीं है कि ये गिरावट आखिर हो क्यों रही है?कई अलग-अलग  थ्योरिज हैं, कार मैन्यूफैक्चरर्स को लगता है कि उनकी खुद की एक अलग थ्योरी है.

मैं आपको ये बताना चाहता हूं कि पिछले साल इस बात की अनिश्चतता थी कि सरकार किसकी बनेगी. हालांकि केंद्र में मजबूत सरकार बन गई है लेकिन केरल में बाढ़ की वजह सेत्योहारी सीजन में बिक्री को झटका लगा. बाद के त्योहारों में इसी वजह से कार की बिक्री नहीं बढ़ी यानी पूरे त्योहारी माहौल में कारों की रिटेल सेलिंग कम ही रही.
पुनीत आनंद, सीनियर जीएम ह्युंडई मोटर्स इंडिया

थोड़ी और गहराई से जानने के लिए हमने डीलर्स से जाना कि वो इस हालात के बारे में क्या सोचते हैं.

द क्विंट ने चेन्नई में कुछ चुनिंदा कार डीलरों से बात की. हालांकि कई ने कैमरे पर बात करने से इनकार कर दिया, लेकिन उन्होंने इस बात से सहमति जताई कि बिक्री में गिरावट आई है. वजह गिनाई गईं- जनरल मार्केट सेंटीमेंट, रूरल डिमांड में गिरावट और इंश्योरेंस कॉस्ट में बढ़त.

दिल्ली में  मारुति, महिंद्रा, फोर्ड और यहां तक कि टाटा जैसे ब्रांड की 5 डीलर्स के पास हम पहुंचे, किसी ने ऑन रिकॉर्ड बात नहीं की, लेकिन हमारे सोर्सेज ने कंज्यूमर्स की लो परचेजिंग पावर को सबसे बड़ी वजह बताई.

अहमदाबाद में भी हालात अलग नहीं है. यहां कार डीलरों ने माना कि व्यापार मंदा हो गया है और डीलरशिप के पास सिर्फ वो भीड़ है जिन्होंने महीनों पहले अपनी कारों को प्रीबुक किया था. डीलर्स ने ज्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया और इस मामले को कार मेकर्स के पल्ले डाल दिया.

इकनॉमिक स्लोडाउन की वजह से मैन्यूफैक्चर्रस के पास स्टॉक पड़े हुए हैं, जो बिके नहीं और इस सेक्टर में नौकरी चाहने वाले लोगों के लिए ये बुरी खबर है.

इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 300 से ज्यादा डीलरशिप की दुकान बंद हो गई और करीब 3,000 लोगों को इस घाटे की वजह से नौकरी गंवानी पड़ी.

बढ़ती फ्यूल प्राइस ने संभावित कार खरीदारों को दुविधा में डाल दिया है कि वो कार में इन्वेस्ट करने की सोचें भी या नहीं. यही नहीं, थर्ड पार्टी इंश्योरेंस में भी बढ़ोतरी हुई है, जिससे लागत और बढ़ जाती है. इसके अलावा जब उबर और ओला सिर्फ एक क्लिक दूर हैं, तो कार क्यों खरीदें?

और तो और, नए सुरक्षा मानक भी लागू होने वाले हैं, सभी कारों को अप्रैल 2020 तक BS-VI इमिशन स्टैंडर्ड को पूरा करना होगा. डीलरशिप भी ग्राहकों को लुभाने के लिए कुछ पुराने मॉडलों पर आकर्षक छूट और ऑफर दे रहे हैं, लेकिन कुछ भी काम नहीं कर रहा है.

जर्मनी के सेंटर फॉर ऑटोमोटिव रिसर्च (CAR) की रिपोर्ट
सिर्फ भारतीय कार बाजार ही इस संकट से नहीं जूझ रहा. दुनिया का सबसे बड़ा कार बाजार चीन भी 15% नीचे चला गया है, वहीं आशंका है कि ग्लोबल मार्केट में भी आने वाले दिनों में गिरावट देखने को मिल सकती है.

उम्मीद की जा रही है कि अक्टूबर-नवंबर के आस-पास फेस्टिव सीजन में चीजें बेहतर होंगी, हालांकि ऐसी उम्मीद करना भी अभी जल्दबाजी ही होगी.

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