बिगड़ती सेहत और घटती सियासी ताकत, लालू यादव क्या कर पाएंगे वापसी?

बिगड़ती सेहत और घटती सियासी ताकत, लालू यादव क्या कर पाएंगे वापसी?

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वीडियो एडिटर: पूर्णेंदू प्रीतम

वीडियो प्रोड्यूसर: कौशिकी कश्यप

लालू प्रसाद यादव का नाम सुनते ही सबसे पहले दिमाग में क्या आता है?

ह्यूमर, हंसी-मजाक, लतीफा?

अब अगर मैं कहूं कि जरा क्रिटिकल होकर सोचिए, तो आप कह सकते हैं- भ्रष्टाचार, जातिवाद, परिवारवाद, सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ने वाला.. वगैरह वगैरह.

बिहार में पिछड़ों, दलितों के राजनीतिक उभार का हीरो और चारा घोटाले का सजायाफ्ता मुजरिम लालू प्रसाद यादव राजनीति का वो डॉक्टर है जिसे आप पसंद करें या ना करें लेकिन नजरअंदाज नहीं कर सकते. वो नेता जो सत्ता से बाहर भले रहा हो लेकिन चर्चा से बाहर कभी नहीं रहा. लालू की इस अतरंगी और स्याह तस्वीर को समझने के लिए आइये चलते हैं जरा फ्लैशबैक में.

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रोकी आडवाणी रथ यात्रा

अक्टूबर, 1990. देश ‘मंदिर वहीं बनाएंगे’ के नारों से गूंज रहा था. गुजरात के सोमनाथ से शुरु हुई बीजेपी के कद्दावर नेता लालकृष्ण आडवाणी की राम रथ यात्रा ने देश भर में हलचल मचा रखी थी. अमन-चैन बिगड़ रहा था. लेकिन प्रशासन चाहकर भी यात्रा के खिलाफ कोई कदम नहीं उठा पा रहा था.

23 अक्टूबर, 1990. बिहार के समस्तीपुर से गुजर रही रथ यात्रा का पहिया 42 साल के एक युवा मुख्यमंत्री ने रोक दिया. उस मुख्यमंत्री का नाम था लालू प्रसाद यादव.

आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया गया और लालू रातों-रात सेक्युलर पॉलिटिक्स के बड़े नेता बन गए.

इमरजेंसी में काटी जेल

लालू यादव ने छात्र नेता के तौर पर राजनीति की शुरुआत की. जयप्रकाश नारायण, राज नारायण, कर्पूरी ठाकुर और सतेंद्र नारायण सिन्‍हा जैसे दिग्गजों की छत्रछाया में उन्होंने पॉलिटिक्स की एबीसीडी सीखी. इमरजेंसी के दौरान कई महीने जेल में काटे. उनकी बड़ी बेटी मीसा के नामकरण की दिलचस्प कहानी है.

लालू Maintenance of Internal Security Act यानी ‘मीसा’ कानून में जेल में बंद थे. उसी दौरान बेटी का जन्म हुआ तो लालू ने कहा कि नाम ‘मीसा’ ही रख दो.

सिर्फ 29 साल की उम्र में लोकसभा का चुनाव जीतकर लालू यादव संसद पहुंचे. अपनी रैलियों में 1974 की ‘संपूर्ण क्रांति’ का नारा दोहराते हुए 10 मार्च 1990 को पहली बार बिहार के मुख्‍यमंत्री बने. 1995 में दूसरी बार राज्य के मुख्‍यमंत्री बने. 1997 में लालू ने जनता दल से अलग होकर राष्ट्रीय जनता दल यानी आरजेडी नाम से अलग पार्टी बना ली.

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बिहार में लालू-राज

90 के दशक में लालू का जलवा अपने चरम पर था. बिहार में नियम-कानून की कोई कीमत नहीं थी. जो लालू कह दें वही कानून था. उस दौरान बिहार में अपहरण और फिरौती का एक पूरा उद्योग खड़ा हो गया. लालू के राज को ‘जंगलराज’ तक कहा गया.

लेकिन अपर कास्ट के खिलाफ उन्होंने मुस्लिम और यादव वोट की वो जुगलबंदी बिठाई कि सूबे की सियासत के सरमाएदार बन गए. साल 1997 में मुख्यमंत्री रहते चारा घोटाले में फंसे तो अब तक एक हाउस-वाइफ रही अपनी पत्नी राबड़ी देवी को सीएम की कुर्सी सौंपकर सबको हैरान कर दिया.

घटती ताकत, बिगड़ती सेहत

लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री रहे, देश के रेल मंत्री रहे. फिलहाल भी वो बिहार की सबसे बड़ी पार्टी रही आरजेडी के नेता हैं. चारा घोटाले में उन्हें सीबीआई की स्पेशल कोर्ट से सजा हुई है. उनकी उम्र 70 पार कर चुकी है और उन्हें अब तक 25 साल से ज्यादा की सजा सुनाई जा चुकी है. सेहत बिगड़ने के कारण इन दिनों उन्हें रांची के एक सरकारी अस्पताल में रखा गया है, जहां वे हफ्ते में सिर्फ तीन लोगों से मिल सकते हैं.

2019 के लोकसभा चुनाव में लालू की पार्टी पूरी तरह साफ हो गई है. कांग्रेस और कई दूसरी पार्टियों के साथ मिलकर बने उनके महागठबंधन को महज एक सीट मिली. बिगड़ती सेहत और घटती सियासी ताकत के साथ लालू अब शायद ही एक्टिव पॉलिटिक्स में वापसी कर पाएं.

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